Types of Network – LAN, MAN , WAN ( नेटवर्क के प्रकार – लैन, मैन, वैन )

Types of Network – LAN, MAN , WAN ( नेटवर्क के प्रकार – लैन, मैन, वैन )

Types of Network (नेटवर्क के प्रकार)

LAN (Local Area Network) :-

इसका पूरा नाम Local Area Network है यह एक ऐसा नेटवर्क है जिसका प्रयोग दो या दो से अधिक कंप्यूटर को जोड़ने के लिए किया जाता है| लोकल एरिया नेटवर्क स्थानीय स्तर पर काम करने वाला नेटवर्क है इसे संक्षेप में लेन कहा जाता हैं| यह एक ऐसा कंप्यूटर नेटवर्क है जो स्थानीय इलाकों जैसे- घर, कार्यालय, या भवन समूहों को कवर करता है|

विशेषताये:-

  1. यह एक कमरे या एक बिल्डिंग तक सीमित रहता है |
  2. इसकी डाटा हस्तांतरित (Data Transfer) Speed अधिक होती है |
  3. इसमें बाहरी नेटवर्क को किराये पर नहीं लेना पड़ता है |
  4. इसमें डाटा सुरक्षित रहता है |
  5. इसमें डाटा को व्यवस्थित करना आसान होता है |
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MAN (Metropolitan Area Network) :-

इसका पूरा नाम Metropolitan Area Network हैं यह एक ऐसा उच्च गति वाला नेटवर्क है जो आवाज, डाटा और इमेज को 200 मेगाबाइट प्रति सेकंड या इससे अधिक गति से डाटा को 75 कि.मी. की दूरी तक ले जा सकता है| यह लेन (LAN) से बड़ा तथा वेन (WAN) से छोटा नेटवर्क होता है | इस नेटवर्क के द्वारा एक शहर को दूसरे शहर से जोड़ा जाता है |

इसके अंतर्गत दो या दो से अधिक लोकल एरिया नेटवर्क एक साथ जुड़े होते हैं. यह एक शहर के सीमाओ के भीतर का स्थित कंप्यूटर नेटवर्क होता हैं. राउटर, स्विच और हब्स मिलकर एक मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क का निर्माण करता हैं|

विशेषताये:-

  1. इसका रखरखाव कठिन होता है |
  2. इसकी गति उच्च होती है |
  3. यह 75 कि.मी. की दूरी तक फैला रहता है |
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WAN (Wide area Network) :-

इसका पूरा नाम Wide Area Network होता है | यह क्षेत्रफल की द्रष्टि से बड़ा नेटवर्क होता है| यह नेटवर्क न केवल एक बिल्डिंग, न केवल एक शहर तक सीमित रहता है बल्कि यह पूरे विश्व को जोड़ने का कार्य करता है अर्थात् यह सबसे बड़ा नेटवर्क होता है इसमें डाटा को सुरक्षित भेजा और प्राप्त किया जाता है |

इस नेटवर्क मे कंप्यूटर आपस मे लीज्ड लाइन या स्विच सर्किट के दुवारा जुड़े रहते हैं. इस नेटवर्क की भौगोलिक परिधि बड़ी होती है जैसे पूरा शहर, देश या महादेश मे फैला नेटवर्क का जाल. इन्टरनेट इसका एक अच्छा उदाहरण हैं. बैंको का ATM सुविधा वाईड एरिया नेटवर्क का उदाहरण हैं.

विशेषताये:-

  1. यह तार रहित नेटवर्क होता है|
  2. इसमें डाटा को संकेतो (Signals) या उपग्रह (Sate light) के द्वारा भेजा और प्राप्त किया जा सकता है |
  3. यह सबसे बड़ा नेटवर्क होता है |
  4. इसके द्वारा हम पूरी दुनिया में डाटा ट्रान्सफर कर सकते है |
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Direction of Transmissions Flow-Simplex, Half Duplex Full Duplex ( ट्रांसमिशन फ्लो-सिंपलक्स, हाफ डुप्लेक्स फुल डुप्लेक्स की दिशा )

Direction of Transmissions Flow-Simplex, Half Duplex Full Duplex

( ट्रांसमिशन फ्लो-सिंपलक्स, हाफ डुप्लेक्स फुल डुप्लेक्स की दिशा )

वह डायरेक्शन जिस पर डेटा या सूचना एक स्थान से दुसरे स्थान पर ट्रांसमिट होती है transmission mode कहलाती है. यह सूचना के flow होने की दिशा को indicate करता है. इसे communication mode भी कहते है.
यह तीन प्रकार के होते है:-

1:-simplex
2:-half-duplex
3:-full-duplex

1:-simplex:-

simplex का अर्थ है कि कम्युनिकेशन केवल एक ही दिशा में होगा. अर्थात sender केवल डेटा को send कर सकता है परन्तु recieve नही कर सकता है.
Fig:-simplex in hindi

उदाहरण:-रेडियो, TV ट्रांसमिशन, रिमोट, मॉनिटर, की-बोर्ड, तथा माउस आदि.

2:-half-duplex:-

half-duplex में हम दोनों दिशाओं में डेटा को send तथा recieve कर सकते है लेकिन एक समय में केवल एक ही दिशा में. अर्थात इसमें एक ही समय में send तथा recieve दोनों कार्य नही हो सकते है. इस mode को कभी-कभी semi-duplex भी कहते है.

उदाहरण:-walkie-talkie में एक समय में केवल एक ही व्यक्ति बात कर सकता है.

3:-full duplex:-

इसमें हम डेटा को एक ही समय में send भी कर सकते है तथा recieve भी कर सकते है. यह सबसे तेज डायरेक्शनल mode है.

उदाहरण:-टेलीफोन कम्युनिकेशन सिस्टम इसका उदाहरण है जहाँ दो व्यक्ति एक ही समय में एक दुसरे से बात कर सकते है.

 

Memory – Primary Vs. Secondary memory.( मेमोरी – प्राथमिक बनाम। माध्यमिक स्मृति )

प्राइमरी मेमोरी क्‍या होती है – What Is Primary Memory

कंप्‍यूटर की संरचना के अनुसार मेमोरी (Memory) कंप्यूटर का वह भाग है यूजर द्वारा इनपुट किये डाटा और प्रोसेस डाटा को संगृहीत करती है, मेमोरी (Memory) में डाटा, सूचना, एवं प्रोग्राम प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहते है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपलब्ध रहते है इसे प्राथमिक मेमोरी या मुख्य मेमोरी भी कहते हैं आईये प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory) के बारे में अधिक जानते हैंं –

प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory) दो प्रकार की होती है – 

  1. रैम (RAM) यानि Random Access Memory 
  2. रोम (ROM) यानि Read Only Memory 

1- रैम (Random Access Memory)

इस मेमोरी (Memory) को कंप्‍यूटर की अस्‍थाई मेमोरी भी कहते हैं इसमें कोई भी डाटा स्‍टोर नहीं रहता है जब तक कंप्‍यूटर ऑन रहता है तब तक रैम में डाटा या प्रोग्राम अस्थाई रूप से संगृहीत रहता है और कंप्‍यूटर प्रोसेसर आवश्‍यक डाटा प्राप्‍त करने के लिये इस डेटा का उपयोग करता है और जैसे ही आप कम्‍यूटर शट डाउन करते हैं वैसे ही सारा डाटा डिलीट हो जाता है इस रैम को (Volatile Memory) भ्‍ाी करते हैं

रैम (RAM) कितने प्रकार की होती है 

रैम तीन प्रकार की होती है – 
  1. डायनेमिक रैम (Dynamic RAM)
  2. सिंक्रोनस रैम (Synchronous RAM)
  3. स्‍टैटिक रैम (Static RAM)

1- डायनेमिक रैम (Dynamic RAM) 

इसे DRAM के नाम से जाना जाता है, डीरैम में डाटा मेमोरी सेल में स्‍टोर होता है, प्रत्‍येक मेमोरी सेल में एक ट्रांजिस्टर और एक कैपेसिटर होता है, जिसमें थोडा थोडा डाटा स्‍टोर किया जाता है लेकिन लगभग 4 मिली सेकेण्‍ड बाद मेमोरी सेल नियंत्रक मेमोरी को रिफ्रेश करते रहते हैं रिफ्रेश करने का अर्थ है कि वह डाटा को रीराइट करते हैं, इसलिये DRAM काफी धीमी होती है, लेकिन यह अन्य मेमोरी के मुक़ाबले कम बिजली खाती है और लंबे समय तक खराब नहीं होती है

2- सिंक्रोनस रैम (Synchronous RAM)

सिंक्रोनस रैम DRAM से ज्‍यादा तेज होती है वजह है कि यह DRAM से ज्‍यादा तेजी से रिफ्रेश होती है, सिंक्रोनस रैम CPU Clock Speed के साथ रिफ्रेश होती है, इसलिये ज्‍यादा तेजी से डाटा स्थानांतरित कर पाती है

3- स्‍टैटिक रैम (Static RAM)

इसे SRAM के नाम से जाना जाता है, Static RAM कम रिफ्रेश होती हैं लेकिन यह डाटा को मेमोरी में अधिक समय तक रख पाती है, यह डाटा को तब तक स्‍‍टोर रखती है जब तक सिस्‍टम को करंट मिलता रहता है यह बहुत तेजी से डाटा को Access करती है  स्‍टैटिक रैम (Static RAM) को जब तक रिफ्रेश नहींं तब तक डाटा स्‍टाेर रहता है इसे कैश रैम (Cache Ram) भी कहते हैं, जाने क्‍या होती है कैश मेमोरी (Cache Memory)

2- रोम (ROM) यानि Read Only Memory

यह एक अस्‍थाई मेमोरी है रोम का पूरा नाम रीड ऑनली मेमोरी होता है, इसको तैयार करते समय जो डेटा या प्रोग्राम डाले जाते हैं वो खत्म नहीं होते हैं कंप्यूटर का स्विच ऑफ होने के बाद भी रोम में संग्रहित डाटा नष्ट नहीं होता हैं इसे Non-volatile Memory भी कहते हैं

रोम (ROM) कितने प्रकार की होती है

रोम (ROM) तीन प्रकार की होती हैं – 

  1. PROM (Programmable Read Only Memory)
  2. EPROM (Erasable Programmable Read Only Memory)
  3. EEPROM (Electrical Programmable Read Only Memory)

1- PROM (Programmable Read Only Memory)

PROM यानि ग्राममेबल रीड ऑनली मेमोरी को केवल एक बार ही डाटा स्‍‍‍टोर किया जा सकता है यानि इसे मिटाया नहीं जा सकता है और ना ही बदला जा सकता है

2- EPROM (Erasable Programmable Read Only Memory)

EPROM का पूरा नाम Erasable Programmable Read Only Memory होता है यह प्रोम (PROM) की तरह ही होता है लेकिन इसमें संग्रहित प्रोग्राम (Store Program) को पराबैगनी किरणों (Ultraviolet rays) के द्वारा ही मिटाया जा सकता है और नए प्रोग्राम संग्रहित (Store) किये जा सकते हैं

3- EEPROM (Electrical Programmable Read Only Memory)

EEPROM का पूरा नाम Electrical Programmable Read Only Memory होता हैं, एक नई तकनीक इ-इप्रोम (EEPROM) भी है जिसमे मेमोरी से प्रोग्राम को विधुतीय विधि से मिटाया जा सकता हैं

कंप्यूटर की सेकेंडरी मेमोरी क्‍या होती है ? – What is Secondary Memory in Hindi

सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) को अलग से जोडा जाता है और यह स्‍टोरेज के काम आती है तो इसे सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस भी कहते हैं, प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory) के अपेक्षा इसकी गति कम होती है लेकिन इसकी Storage क्षमता प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory) अधिक होती है और जरूरत पडने पर इसे अपग्रेड (घटाया या बढाया) किया जा सकता है, आईये जानते हैं सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) कितने प्रकार की होती है

1.मैग्नेटिक/चुम्बकीय टेप (Magnetic Tape)
2.मैग्नेटिक/चुम्बकीय डिस्क (Megnetic Disk) 
3.ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk)
4.यूऍसबी फ्लैश ड्राइव (USB Flash Drive)

1- मैग्नेटिक/चुम्बकीय टेप (Magnetic Tape)
यह देखने में किसी पुराने जमाने के टेप रिकार्डर की कैसेट की तरह होती थी, इसमें प्‍लास्टिक के रिबन पर चुम्बकीय पदार्थ की परत चढी होती थी, जिस पर डाटा स्‍टोर करने के लिये हेड का प्रयोग किया जाता था बिलकुल टेप रिकार्डर की तरह, इस डाटा का कितनी बार लिखा और मिटाया जा सकता था और यह काफी सस्‍ते होते थे

2- मैग्नेटिक/चुम्बकीय डिस्क (Megnetic Disk)
मैग्नेटिक/चुम्बकीय डिस्क (Megnetic Disk) दो प्रकार की होती हैं – 
     1फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)
     2हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) 

1फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)-
फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) के बहुत पतले प्‍लास्टिक की एक गोल डिस्‍क होती है जो एक प्‍लास्टिक के कवर में बंद रहती थी, इस डिस्‍क पर चुम्बकीय पदार्थ की परत चढी होती थी, फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) आकार एवं और स्‍टोरेज के आधार पर दो प्रकार की होती है –
मिनी फ्लॉपी (Mini Floppy) – मिनी फ्लॉपी (Mini Floppy) का व्‍यास (Diameter) 3½ इंच होता है और इसकी स्‍टोरेज क्षमता 1.44 MB होती है इसे कंप्‍यूटर में रीड करने के लिये 3½ इंच के फ्लॉपी डिस्क रीडर (Floppy disk reader) की आवश्‍यकता होती है, यह लगभग 360 RPM यानि Revolutions Per Minute यानि चक्‍कर/घूर्णन प्रति मिनट की दर से घूमती है इसी प्रकार
माइक्रो फ्लॉपी (Micro Floppy) – माइक्रो फ्लॉपी (Micro Floppy) का व्‍यास (Diameter) 5½ इंच होता है और इसकी स्‍टोरेज क्षमता 2.88 MB होती है, इसके भी 5½ इंच के फ्लॉपी डिस्क रीडर (Floppy disk reader) की आवश्‍यकता होती है

नोट – कंप्‍यूटर में “ए” और “बी” ड्राइव का इस्‍तेमाल फ्लॉपी डिस्क के लिये ही होता था और आज भी वर्तमान में “A” और “B” ड्राइव फ्लॉपी डिस्क के लिये ही Reserveरहती है, हालांकि इसका प्रयोग बिलकुल बंद हो चुका है

Basic Components of A Computer System/ Block Diagram ( एक कंप्यूटर सिस्टम / ब्लॉक आरेख के मूल घटक )

  1. Input Device:-

Input Device वे Device होते है जिनके द्वारा हम अपने डाटा या निर्देशों को Computer में Input करा सकते हैं| Computer में कई Input Device होते है ये Devices Computer के मस्तिष्क को निर्देशित करती है की वह क्या करे? Input Device कई रूप में उपलब्ध है तथा सभी के विशिष्ट उद्देश्य है टाइपिंग के लिये हमारे पास Keyboard होते है, जो हमारे निर्देशों को Type करते हैं|

Input Device वे Device है जो हमारे निर्देशों या आदेशों को Computer के मष्तिष्क, सी.पी.यू. (C.P.U.) तक पहुचाते हैं|

Input Device कई प्रकार के होते है जो निम्न प्रकार है –

  • Keyboard
  • Mouse
  • Joystick
  • Trackball
  • Light pen
  • Touchscreen
  • Digital Camera
  • Scanner
  • Digitizer Tablet
  • Bar Code Reader
  • OMR
  • OCR
  • MICR
  • ATM etc.
  1. C.P.U.:-

C.P.U का पूरा नाम सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) हैं| इसका हिंदी नाम केन्द्रीय संसाधन इकाई होता हैं| यह Computer का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता हैं| अर्थात इसके बिना Computer सिस्टम पूर्ण नहीं हो सकता है, इससे सभी Device जुड़े हुए रहते है जैसे- Keyboard, Mouse, Monitor आदि | इसे Computer का मष्तिस्क (Mind) भी कहते है| इसका मुख्य कार्य प्रोग्राम (Programs) को क्रियान्वित (Execute) करना है इसके आलावा C.P.U Computer के सभी भागो, जैसे- Memory, Input, Output Devices के कार्यों को भी नियंत्रित करता हैं|

C.P.U (Central Processing Unit) के तीन भाग होते है

  • A.L.U.
  • Memory
  • C.U.

(a) A.L.U (Arithmetic Logic Unit):-

एरिथ्मेटिक एवं लॉजिक यूनिट को संक्षेप में A.L.U  कहते हैं| यह यूनिट डाटा पर अंकगणितीय क्रियाएँ (जोड़, घटाना, गुणा, भाग) और तार्किक क्रियायें (Logical operation) करती हैं| A.L.U Control Unit से निर्देश लेता हैं| यह मेमोरी (memory) से डाटा को प्राप्त करता है तथा Processing के पश्चात सूचना को मेमोरी में लौटा देता हैं| A.L.U के कार्य करने की गति (Speed) अति तीव्र होती हैं| यह लगभग 1000000 गणनाये प्रति सेकंड (Per Second) की गति से करता हैं| इसमें ऐसा इलेक्ट्रॉनिक परिपथ होता है जो बाइनरी अंकगणित (Binary Arithmetic) की गणनाएँ करने में सक्षम होता हैं|

 (b) Memory:-

यह Input Device के द्वारा प्राप्त निर्देशों को Computer में संग्रहण (Store) करके रखता है इसे Computer की याददाश भी कहाँ जाता है| मानव में कुछ बातों को याद रखने के लिये मष्तिस्क होता है, उसी प्रकार मेमोरी (Memory) हैं| यह मेमोरी C.P.U का अभिन्न अंग है, यह एक संग्राहक उपकरण (Storage Device) हैं| अतः इसे Computer की मुख्य मेमोरी (Main memory), आंतरिक मेमोरी (Internal Memory), या प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) भी कहते हैं|

“Computer का वह स्थान जहाँ सभी सूचनाओ, आकडों या निर्देशों को Store करके रखा जाता है मेमोरी कहलाती हैं|”

(c) C.U.:-

जतकC.U. का पूरा नाम कंट्रोल यूनिट (Control Unit) होता हैं| C.U. हार्डवेयर कि क्रियाओ को नियंत्रित और संचालित करता हैं| यह Input, Output क्रियाओ को नियंत्रित (Control) करता है साथ ही Memory और A.L.U. के मध्य डाटा के आदान प्रदान को निर्देशित करता है यह प्रोग्राम (Program) को क्रियान्वित करने के लिये निर्देशों को मेमोरी से प्राप्त करता हैं| निर्देशों को विधुत संकेतों (Electric Signals) में परिवर्तित करके यह उचित डीवाइसे पहुचता हैं|

  1. Output Device:-

Output Device वे Device होते है जो User द्वारा इनपुट किये गए डाटा को Result के रूप में प्रदान करते हैं |

Output Device के द्वारा कंप्यूटर से प्राप्त परिणामो (Result) को प्राप्त किया जाता है इन परिणामों को प्राय: डिस्प्ले डीवाइसेज (स्क्रीन) या प्रिंटर के द्वारा User को प्रस्तुत किया जाता हैं| मुख्य रूप से Output के रूप में प्राप्त सूचनाएं या तो हम स्क्रीन पार देख सकते है या प्रिंटर से पेज पर प्रिंट कर सकते है या संगीत सुनने के लिये आउटपुट के रूप में स्पीकर का उपयोग कर सकते हैं, Output Device कई प्रकार के होते है जैसे-

  • Monitor
  • Printer
  • Plotter
  • Projector
  • Sound Speaker

Limitations of Computer in Hindi ( कंप्यूटर की सीमाएं )

कंप्यूटर की सीमाएं – (Limitations of Computer)

कंप्यूटर की विशेषताएं तो आप जान ही चुके हैं, कंप्‍यूटर आपके बहुत सारे कामों को करता है लेकिन कंप्यूटर की कुछ सीमाएं भी होती हैं जिसने बाहर कंप्‍यूटर कार्य नहीं कर सकता है आईये जानते हैैं कंप्यूटर की सीमाएं क्या है – कंप्यूटर की सीमाएं – (Limitations of Computer)

बुद्धिमता की कमी (Lack of Intelligence) – कम्प्यूटर एक मशीन है । उसमें मनुष्‍‍‍य के समान बुद्धिमता (Intelligence) नहीं है यह केवल यूजर द्वारा दिये गये निर्देशों का पालन करता हैं, किसी भी स्थिति में कंप्‍यूटर न तो दिये गये निर्देशों से कम काम करता है

सामान्य बोध की कमी (Lack of Common Scene) – यह भी जानना जरूरी है कि कंप्‍यूटर कभी कोई गलती नहीं करता है, लेकिन अगर यूजर उससे गलत काम लेता है तो उसे इसका सामान्य बोध यानि Common Scene नहीं हाेता है अगर आपने कंप्‍यूटर को बताया नहीं है “सीमा एक लडकी है” तो वह उसे by default लडका ही मानेगा, उसे नाम में फर्क करना नहीं आता है, pc एक बुद्धिमान मशीन नहीं है यह सही या गलत कि पहचान नहीं कर पाती है|

विद्युत पर निर्भरता (Dependence on electricity) – कंप्‍यूटर को काम करने के लिये विद्युत ( electricity) की आवश्‍यकता होती है बिना विद्युत ( electricity) केे कंप्‍यूटर एक धातु के डब्‍बे से ज्‍यादा और कुुछ नहीं है

अपग्रेड और अपडेट (Upgrade and Update) – कम्प्यूटर एक ऐसी मशीन है जिसे समय समय पर अपग्रेड और अपडेट (Upgrade and Update) करना होता है यदि ऐसा नहीं किया तो कंप्‍यूटर ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पाता है

वायरस से खतरा (Virus threat) – कंप्‍यूटर को हमेशा वायरस का खतरा बना रहता है, एक बार वायरस आने पर यह कंप्‍यूटर ऑपरेटिंग सिस्‍टम के साथ उसमें सुरक्षित फाइलों को भी नुकसान पहॅुचा सकता है

Computer System Characteristics/Features ( कंप्यूटर सिस्टम लक्षण / विशेषताएं )

Computer System Characteristics/Features ( कंप्यूटर सिस्टम लक्षण / विशेषताएं )

Computer System Concept (कंप्यूटर सिस्टम लक्षण / विशेषताएं)

एक या एक से अधिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कार्यरत इकाइयों के समूह को एक “System” कहते हैं| जैसे – Hospital एक System है जिसकी इकाइयां (units) Doctor, Nurse, Medical, Treatment, Operation, Peasant आदि हैं | इसी प्रकार laptop भी एक System के रूप में कार्य करता है जिसके निम्नलिखित भाग हैं|

Hardware
Software
User
Hardware:- laptop के वे भाग जिन्हें हम छु सकते है देख सकते है Hardware कहलाते हैं| जैसे-Keyboard, Mouse, Printer, Scanner, Monitor, C.P.U. etc.

Software:- Computer के वे भाग जिन्हें हम छु नहीं सकते सिर्फ देख सकते हैं सॉफ्टवेयर (Software) कहलाते हैं| जैसे- MS Word, MS Excel, MS PowerPoint, Photoshop, PageMaker etc.

User:- वे व्यक्ति जो laptop को चलाते है Operate करते है और Result को प्राप्त करते है, User कहलाते हैं|

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